निगाहों में छुपा के रखा है तुझे,
जहाँ भी देखा, सारे जहाँ में पाया है तुझे।
दिल की किताब में नाम तेरा लिखा है,
हर साज़ में तेरी याद का साया पाया है तुझे।
चाँदनी रात में तेरा ही चेहरा दिखता है,
सन्नाटों में भी तेरी आवाज़ गूंजता पाया है तुझे।
वो जो हँसी तेरी है, बहारों की तरह,
सूनी राहों में भी खुशबू बिखरी पाया है तुझे।
तन्हाई में भी तू पास ही लगता है,
सपनों की दुनिया में तू साथ ही पाया है तुझे।
हर जज़्बात में तेरी मोहब्बत बसती है,
हर धड़कन में तेरी यादें रहती पाया है तुझे।
तेरी मोहब्बत के आगे सब व्यर्थ है,
जी आर के अल्फाज़ ही सबसे मुनासिब पाया है तुझे।
जी आर कवियुर
22 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)
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