Tuesday, January 6, 2026

बस छोड़ दो

बस छोड़ दो

जब बारिश शुरू हो जाए  
और आसमान स़लेटा लगे  
जब शब्द खो जाएँ  
जो तुम्हें चाहिए थे

एक साँस लो, प्रिय, और छोड़ दो  
कभी-कभी बस यही करना ही पर्याप्त है

ऊपर उठो, बस छोड़ दो  
समुद्र के पार शांति है  
घाव भरेंगे, दिल ठीक होंगे  
समय दिखाएगा क्या होना है —
बस छोड़ दो

जब रात लंबी और ठंडी लगे  
और साहस थक जाए  
हवा के साथ बह जाने दो  
जो तुम्हारा है वही रहेगा, जो नहीं है चला जाएगा

जब रास्ता दूर और विस्तृत लगे  
और शक्ति अंदर से चली गई लगे  
अपनी आँखें बंद करो, हवा के साथ बहो  
स्मृतियों में शांति पाओ

ऊपर उठो, बस छोड़ दो  
समुद्र के पार शांति है  
घाव भरेंगे, दिल ठीक होंगे  
समय दिखाएगा क्या होना है —
बस छोड़ दो

हर तूफ़ान कभी टूट जाएगा  
हर आँसू अपना रास्ता पाएगा  
ख़ामोशी में तुम देखोगे  
छोड़ देने में सुकून है

ऊपर उठो, बस छोड़ दो  
थके हुए मन को आज़ाद करो  
सपने लौटेंगे, दिल फिर विश्वास करेगा  
प्रकाश पत्तियों के बीच तुम्हें ढूँढेगा —
बस छोड़ दो

जी आर कवियुर 
06 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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