Friday, January 9, 2026

नग्नता

नग्नता

नग्नता केवल वस्त्रों की कमी नहीं है  
यह वह अवस्था है जहाँ छुपाने को कुछ नहीं बचता  
गरीबी के सामने शरीर खुला खड़ा रहता है  
सम्मान भी रक्षा नहीं कर पाता  

आँखों में चुपचाप शर्म भर जाती है  
ठंड से बचने को हाथ स्वयं को थाम लेते हैं  
शब्द बाहर आने से डरते हैं  
नज़रें सीधे दिल को भेद देती हैं  

नग्न सत्य हर किसी को स्वीकार नहीं होता  
समाज मुँह फेर लेता है  
करुणा मौन बनकर खड़ी रहती है  
और मनुष्य भीतर से टूट जाता है

जी आर कवियुर 
08 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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