Tuesday, January 20, 2026

नीला आकाश

नीला आकाश

नीला आकाश फैला, मौन और विशाल  
बादल भटके धीरे, सपनों की चाल  
सूरज की किरणें चूमें दूर की पहाड़ी  
हवा लाए यादें, नरम और साधी  

पंछी बनाएं चित्र आनंद के पल  
तारे जगाएं धीरे, रात की हलचल  
छायाएँ कहें समय की कथा  
मन सुनता भीतर की गूँज गाथा  

प्रकृति देती शांत सांस की बेला  
विचार बहें मुक्त, बिना किसी खेला  
जीवन के पाठ निकलें नीरव धार में  
हृदय जागे सपनों के संसार में

जी आर कवियुर 
20 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)

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