वह बीते हुए दिनों की कहानी आज भी
मन को इतना सताते हैं, याद की निशानी आज भी
दिन और रातें, वो मुलाक़ातें हमें
इतना रगिन लगाती हैं, छू जाती आज भी
मन में यह बात नहीं मिटती कभी
वो सब मिलके ग़ज़ल बनती आज भी
चाँदनी में डूबी हमारी बातें
दिल को फिर भी जलाती हैं आज भी
हँसी तेरी, वो मीठी नज़रों की बातें
भटकते मन को पिघलाती हैं आज भी
वो दूरी, वो तन्हाई, वो बेवफ़ाई
यादों के रंग में बसाती हैं आज भी
जी आर कहते हैं, मेरे दिल की सुनो कहानी
शब्दों में बसी रहती है मेरी जवानी आज भी
जी आर कवियुर
20 01 2026
(कनाडा, टोरंटो)
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