तेरे ग़म में ग़ज़ल गाना ही करार है
क़ाफ़िया-रदीफ़ ढूँढना भी अब करार है X(2)
रात की खामोशी में तेरी यादें मुस्कुराईं
हर लफ़्ज़ में तेरी बातों का ही करार है X(2)
दिल के हर कोने में तेरी तस्वीर बसी है
तेरे बिना इस दिल का कोई ही करार है X(2)
टूटे हुए अरमानों को सजाने की कोशिश
तेरी याद में ही इस दिल का ही करार है X(2)
मंज़िलों से नहीं डरते, राहें चाहे कठिन हों
हर मोड़ पर तेरे नाम का ही करार है X(2)
जी आर कहे, किस्मत से अब शिकायत नहीं
सांसों की हर धड़कन में तेरे नाम का ही करार है X(2)
जी आर कवियुर
02 01 2026
( कनाडा, टोरंटो)
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