कल का भरोसा
बीते कल का विश्वास
बीते कल का विश्वास
आज में फैलता है
कल का भरोसा
आने वाले क्षणों में देखेंगे क्या होगा (X2)
कल का भरोसा
बीते कल का विश्वास
प्रतिबिंब गिरते हैं दिलों में
सपनों के रंग उजागर होते हैं
जब मौन धीरे-धीरे बोलता है
क्षण चुपचाप बहते हैं (X2)
कल का भरोसा
बीते कल का विश्वास
समय बिना पूछे चलता रहता है
हम अकेले अर्थ खोजते हैं
सभी उत्तर अज्ञात
जीवन आगे बढ़ता है (X2)
कल का भरोसा
बीते कल का विश्वास
जी आर कवियुर
12 01 2026
(कनाडा , टोरंटो)
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