Wednesday, January 14, 2026

कल का भरोसा

कल का भरोसा

कल का भरोसा  
बीते कल का विश्वास  

बीते कल का विश्वास  
आज में फैलता है  
कल का भरोसा  
आने वाले क्षणों में देखेंगे क्या होगा (X2)

कल का भरोसा  
बीते कल का विश्वास  

प्रतिबिंब गिरते हैं दिलों में  
सपनों के रंग उजागर होते हैं  
जब मौन धीरे-धीरे बोलता है  
क्षण चुपचाप बहते हैं (X2)

कल का भरोसा  
बीते कल का विश्वास  

समय बिना पूछे चलता रहता है  
हम अकेले अर्थ खोजते हैं  
सभी उत्तर अज्ञात  
जीवन आगे बढ़ता है (X2)

कल का भरोसा  
बीते कल का विश्वास

जी आर कवियुर 
12 01 2026
(कनाडा , टोरंटो)

No comments:

Post a Comment