Wednesday, January 14, 2026

सुकून मिलता हैं (ग़ज़ल)

सुकून मिलता हैं (ग़ज़ल)

तू जब करीब होतो, दिल को सुकून मिलता हैं  
तेरे ही ख्यालों में दिल को सुकून मिलता हैं (X2)

तेरी मुस्कान की छाँव में, हर शाम कुछ खास लगती हैं  
तेरे ही ख्यालों में दिल को सुकून मिलता हैं (X2)

आँखों में तेरी जो नमी है, हर राज़ दिल में बसता हैं  
दिल की हर धड़कन में बस तेरा ही नाम गूंजती हैं, सुकून मिलता हैं (X2)

राहों में तेरे चलते चलते, हर मोड़ खूबसूरत लगती हैं  
हर ग़म को तेरे प्यार की रोशनी में भुला देती हैं, सुकून मिलता हैं (X2)

जो भी मिला है तुझसे, वो ख्वाबों से भी हसीन लगता हैं  
जी आर तेरे ही नाम में हर दर्द को सुकून मिलता हैं (X2)

तेरे बिना तो हर खुशी भी फीकी-सी लगती हैं  
तेरे ही ख्यालों में दिल को सुकून मिलता हैं (X2) 

जी आर कवियुर 
13 01 2026
 (कनाडा, टोरंटो)

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