Sunday, August 9, 2026

जड़ों की प्रार्थना

जड़ों की प्रार्थना

जड़ों ने धरती को थामे रखा,
मौन में प्रार्थना करती रहीं।
अनदेखे मार्गों से होकर
वे जीवन की धार खोजती रहीं।

जब शाखाएँ आकाश की ओर बढ़ीं,
नींव और गहराई में उतरती गई।
अनकहे त्याग
हरियाली बनकर खिल उठे।

आशीर्वाद उस वृक्ष को नहीं मिला
जो केवल ऊँचाई चाहता था,
बल्कि उन जड़ों को मिला
जो गहराई की खोज में थीं—
विनम्रता ही विकास की प्रार्थना है।

जी आर कवियुर 
06 08 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर

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