Tuesday, August 25, 2026

पंछी की पहली उड़ान


पंछी की पहली उड़ान

नन्हे से घोंसले की गर्मी में पला,
पंखों में सपनों को सँजोए रहा,
नीले गगन का अद्भुत विस्तार देख,
मन में एक अनजानी चाह जगी।

माँ के पंखों की छाँव छोड़कर,
धीरे से बाहर झाँकने लगा,
हवा की लय को सीने में भरकर,
डर के भीतर साहस जाग उठा।

एक पल को आँखें मूँदकर,
दोनों पंख खुले आकाश में,
नीचे की दुनिया छोटी लगने लगी,
ऊपर नया क्षितिज सामने था।

गिरने का डर पीछे छोड़कर,
हवा के संग ऊपर उठता गया,
पहली उड़ान की उस थरथराहट में भी,
आजादी का मधुर गीत सुनाई दिया।

जी आर कवियुर 
22 08 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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