(ग़ज़ल)
तेरी आँखों में कैसा ख़ुमार रहा है,
मेरे दिल को तेरा इंतज़ार रहा है।
तेरी बातों की वो मीठी रवानी,
दिल पे अब तक वही क़रार रहा है।
चाँद निकला तो तेरा ख़याल आया,
रात भर दिल में इक बहार रहा है।
तेरे ख़ामोश लबों की वो मुस्कान,
दिल में छुपा हुआ इज़हार रहा है।
दूर होकर भी तू करीब है इतना,
हर घड़ी तेरा ही दीदार रहा है।
तेरी यादों ने जब छुआ दिल को,
साँस में फिर वही ख़ुमार रहा है।
जी आर लिखता रहा तेरी चाहत,
दिल में बस तेरा ही प्यार रहा है।
रचनाकार
जी आर कवियुर
28 08 2026
( तिरुवल्ला , कवियुर)
No comments:
Post a Comment