(एक महफ़िलनुमा ग़ज़ल)
आज ये मन में ठान लिया, तुमसे इतना चाहत था,
दिल ने हर पल मान लिया, तुमसे इतना चाहत था।
तेरी हँसी को फूल समझकर दिल ने जान लिया,
तेरी हर एक बात में अपना अरमान लिया।
तेरी आँखों की चमक को मन ने पहचान लिया,
तेरे संग बीते पलों को जीवनदान लिया।
दूर रहे तुम फिर भी दिल ने तुमको पास लिया,
तेरी यादों को ही अपना सारा जहान लिया।
जी. आर. ने दिल से तुम्हें अपना जान लिया,
हर धड़कन ने बस तुमको पहचान लिया।
रचनाकार
जी आर कवियुर
27 08 2026
( तिरुवल्ला , कवियुर)
No comments:
Post a Comment