जब वर्षा की बूँद ने
प्रकाश को छू लिया,
सातों रंग खिल उठे,
आकाश की मौन मुस्कान में
एक नया स्वप्न जन्म लेने लगा।
जो सौंदर्य छूना संभव न था,
वही हृदय के सबसे निकट आ गया।
दूरी तो केवल आँखों का भ्रम थी,
प्रेम हर सीमा को पार बहता रहा।
चमत्कार इंद्रधनुष के उस पार नहीं था,
वह तो यहीं प्रतीक्षा कर रहा था।
विश्वास के एक छोटे-से कदम से
जीवन रंगों में खिल उठा।
जी आर कवियुर
02 08 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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