Sunday, August 16, 2026

कहता है वो(ग़ज़ल)

कहता है वो
(ग़ज़ल)
कहता है वो, मगर बात बताता नहीं है वो,
अंगारों में चमकता है, दिल में गूँजता है वो।

राज़-ए-दिल को होंठों पे कभी लाता नहीं है वो,
चुप रहकर भी हर बात समझाता है वो।

दूर रहके भी मेरी साँसों में समाता है वो,
याद बनकर हर घड़ी दिल को सताता है वो।

रात की तन्हाइयों में चाँद बन जाता है वो,
टूटते तारों में मुझको मुस्कुराता है वो।

मैं उसे भूलूँ भी तो कैसे भुला पाता है वो,
मेरी हर धड़कन में फिर लौट आता है वो।

‘जी आर’ पूछता है दिल से, ये कैसा राज़ है,
दूर रहकर भी जो हर पल पास आता है वो।

जी आर कवियुर 
15 08 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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