तेरी यह ख़ामोशी मुझे वाग्मी बना देती है
तेरी हर इक अदा मुझे दीवाना बना देती है
तेरी आँखों में छुपा कोई अफ़साना बना देती है
एक नज़र मेरी धड़कनों को परवाना बना देती है
तेरी यादों की महक जब साँसों में उतरती है
सूना दिल भी मेरा एक आशियाना बना देती है
तेरे मिलने की तमन्ना दिल में जब जागती है
हर राह को मेरी तेरे दर का ठिकाना बना देती है
तेरी बातों में मोहब्बत का जो रंग घुलता है
ज़िंदगी को मेरी इक हसीन तराना बना देती है
तेरी दूरी भी अजब रंग दिखाती है मुझको
आँखों में दर्द का गहरा ख़ज़ाना बना देती है
‘जी आर’ तेरी मोहब्बत का ये कैसा अफ़साना
मेरी ख़ामोशियों को भी तराना बना देती है
जी आर कवियुर
16 08 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)
No comments:
Post a Comment