Sunday, August 9, 2026

नीलेपन की गहराई

नीलेपन की गहराई

नीलेपन की गहराइयों में
मौन लहरों-सा बहता रहा।
बादलों से अछूता विस्तार
अनंत की तरह फैलता गया।

आँखों की देखी दूरियों से कहीं आगे
हृदय अपनी यात्रा पर निकल पड़ा।
अनकहे स्वप्न
प्रकाश बनकर खिल उठे।

मैंने आकाश को नहीं,
अपने ही अंतर्मन की विशालता को मापा।
जिस क्षण मैंने गहराई को खोजा,
सारी सीमाएँ विलीन हो गईं।

जी आर कवियुर 
06 08 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर

No comments:

Post a Comment