कोयल के गीतों के बीच
एक पल का मौन उतर आया।
अनसुने संगीत की तरह
सारा वन प्रतीक्षा में ठहर गया।
पत्ते निःशब्द खड़े रहे,
हवा भी धीरे से मुड़ गई।
आने वाले स्वर की प्रतीक्षा में
भोर ने भी कान लगा दिए।
वह अनगाया हुआ क्षण
गीत से भी अधिक मधुर था।
मौन की गहराई में छिपकर
अगली धुन जन्म ले रही थी।
तभी समझ आया—
संगीत को केवल स्वर नहीं चाहिए,
हृदय को छूने के लिए
कभी-कभी एक विराम भी चाहिए।
जी आर कवियुर
11 08 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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