तेरी ये बात कहने को दिल चाहता था,
मगर मासूम दिल चुप ही रहा करता था।
तेरी महफ़िल में यार, ऐसा तकल्लुफ़ भी रहा,
दिल क़रीब आके भी फ़ासला करता था।
तेरी आँखों में जो कुछ था, समझता था मैं,
फिर भी हर बात से ख़ुद को जुदा करता था।
तूने पूछा भी कभी हाल मेरे दिल का मगर,
मैं मुस्कुराकर तुझे ठीक कहा करता था।
कितनी बातें थीं जो होंठों पे ठहर जाती थीं,
मेरा ख़ामोश सा चेहरा ही कहा करता था।
‘जी.आर.’ अपने दिल की ये हालत न पूछना,
जो कह न सका, वही उम्र भर कहा करता था।
रचनाकार
जी आर कवियुर
21 08 2026
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