Tuesday, August 25, 2026

तू ग़ज़ल बनके (ग़ज़ल)

तू ग़ज़ल बनके 
(ग़ज़ल)
तू ग़ज़ल बनके मेरे दिल में उतर जाओगे,
गर मेरी ज़िंदगी में आके सँवर जाओगे।

तेरी आँखों में मोहब्बत का अगर रंग भरा,
मेरी दुनिया के अँधेरों में निखर जाओगे।

तेरी आवाज़ में जब मेरा भी नाम आएगा,
मेरी ख़ामोश धड़कनों में ठहर जाओगे।

तेरे आने से महक जाएगा वीरान ये दिल,
सूखे मौसम में भी सावन-से बिखर जाओगे।

मैंने चाहा है तुझे टूट के इस आलम में,
मेरी पलकों से हसीं ख़्वाब-से गुज़र जाओगे।

“जी आर” को है यक़ीं, इश्क़ की इस राह में तुम,
मेरी ग़ज़लों की तरह दिल में उतर जाओगे।

रचनाकार
जी आर कवियुर 
23 08 2026

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