Friday, September 25, 2026

नज़र आई है ( ग़ज़ल )

नज़र आई है ( ग़ज़ल )

मेरे अरमानों की ख़ातिर तू नज़र आई है,
दिल में छुपी थी जो, वही अब नज़र आई है।

तेरी यादों में बसी एक तन्हाई नज़र आई है,
सूनी रातों में तेरी परछाई नज़र आई है।

तेरे जाने से हुई दिल में जो रुसवाई नज़र आई है,
मेरी आँखों में मोहब्बत की गहराई नज़र आई है।

तेरे आने की ख़बर पाकर जो अंगड़ाई नज़र आई है,
सूखे होंठों पे फिर से मुस्कुराई नज़र आई है।

जी आर, तेरी ग़ज़ल में दिल की गहराई नज़र आई है,
हर एक मिसरे में तेरी ही परछाई नज़र आई है।


जी आर कवियुर 
25 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर

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