हज़ार बार (ग़ज़ल)
हज़ार बार तुझसे मिन्नतें किया करते हैं,
तेरा ही चेहरा दिल में लिए प्यार किया करते हैं।
तेरी राहों में बिछी रहती हैं मेरी नज़रें,
तेरे आने का हर पल इंतज़ार किया करते हैं।
तेरी ख़ामोश निगाहें बहुत कुछ कहती हैं,
हम उन्हीं आँखों से दिल का इज़हार किया करते हैं।
तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखते हैं,
तेरे दीदार की ख़ातिर दिल बेकरार किया करते हैं।
तेरी उल्फ़त ने हमें ऐसा बना दिया है,
हर ख़ुशी तेरे नाम से निसार किया करते हैं।
‘जी आर’ तेरी यादों में ग़ज़ल लिखते हैं, हर एक शेर को तेरा ही दीदार किया करते हैं।
रचनाकार
जी आर कवियुर
12 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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