ज़िंदगी है क्या, ज़िंदादिलों का कारवाँ,
हर कदम पर मिलती नई एक दास्ताँ,
ग़म की घटाएँ हों या खुशियों की बहार,
चलते रहें तो खिलता रहे आसमाँ।
राहों में काँटे हों या फूलों की महक,
हौसला हो दिल में तो आसान हर सफ़र,
हार को भी जीत में बदल दे ये जुनून,
मुस्कुराते चल पड़े तो मिटे हर डर।
कल की फ़िक्र छोड़, आज को सँवार ले,
बीते लम्हों से कुछ सीख, आगे निहार ले,
ज़िंदगी तो नाम है चलते रहने का,
हर नई सुबह को दिल से पुकार ले।
दोस्तों के साथ हो तो राहें हसीन हैं,
अपनों की मोहब्बत में खुशियाँ यक़ीन हैं,
दिल में उम्मीद हो, आँखों में रोशनी,
ज़िंदगी के रंग फिर कितने रंगीन हैं।
जी आर कवियुर
16 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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