भीड़ भरी राह में एक चेहरा मिला,
जाने क्यों अपना-सा लगा;
नाम नहीं मालूम, जगह भी अनजान,
फिर भी दिल में ठहर गया।
उन आँखों में कोई कहानी थी,
होंठों पर गहरी खामोशी थी;
वह अनजाना-सा एहसास मगर
पुराना कोई रिश्ता लगा।
वह चेहरा राह से दूर चला गया,
फिर मुड़कर देखा भी नहीं;
फिर भी उसकी छवि आज तलक
यादों से कभी मिट पाई नहीं।
जी आर कवियुर
07 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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