टूटी डाल पर खिला फूल
टूटी हुई एक डाल के सिरे पर
एक नन्हा फूल खिल आया,
हवा ने जब धीरे से छूकर उसे,
वह चुपके से मुस्कुराया।
सहारा देने वाला कोई न था,
फिर भी रंग बिखेरता रहा,
गिर जाने के डर को भूलकर
सूरज की ओर देखता रहा।
जिन राहों पर दर्द मिला हो,
वहाँ उम्मीद मरती नहीं,
एक छोटे से फूल के भीतर भी
जीवन की कमी होती नहीं।
घायल शाख पर भी एक सपना
नई सुबह बनकर आया,
उस फूल की सुंदरता ने मुझको
जीना फिर से सिखलाया।
जी आर कवियुर
18 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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