टूटे हुए नीले आकाश के
टुकड़े किसी ने चुन लिए,
यादों के धागों से फिर
बिखरे बादल सिल दिए।
घायल हुई उस साँझ के माथे पर
जब लालिमा की बिंदी खिली,
जो सपने कभी खो गए थे
वे सब तारे बनकर मिले।
हवा की उँगलियाँ छू गईं तो
कुछ सिलाइयाँ ढीली पड़ीं,
फिर भी गिरी हुई रोशनी की किरचें
रात ने बाँहों में भर लीं।
पूरा नहीं है यह आसमान,
फिर भी इसकी सुंदरता कम नहीं;
टूटे हुए दिल को जोड़ लिया जाए,
तो जीवन भी आकाश बन जाता है।
जी आर कवियुर
09 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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