(ग़ज़ल)
जब से तुझे याद किया, दिल में हलचल मची है,
तेरी यादों की महफ़िल दिल में हर पल सजी है।
तेरी तस्वीर आँखों में अब तक बसी है,
हर एक साँस में तेरी खुशबू बसी है।
रात तन्हा है, मगर चाँदनी कुछ कह रही है,
तेरी यादों में ये रात धीरे-धीरे ढली है।
दर्द जितना भी मिला, मुस्कुराकर सह लिया,
तेरी चाहत की मेरे दिल में लौ अब भी जली है।
तेरे आने की उम्मीद आज भी बाकी है दिल में,
इसी उम्मीद से ये ज़िंदगी मेरी चली है।
कौन समझेगा भला दिल की ये ख़ामोशियाँ,
हर धड़कन में तेरी ही एक कहानी छिपी है।
जी आर ने भी तुझे दिल से भुलाना चाहा था,
मगर हर बार तेरी याद ही आगे खड़ी है।
रचनाकार
जी आर कवियुर
04 09 2026
( तिरुवल्ला , कवियुर)
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