बरसे नैना, तरसे जैसे बिखरे बादल की तरह
बिरहा में ढूँढूँ तेरे पदचिह्न, पागल की तरह
तेरी यादों के बादल दिल पे बरसते रहे
हम तड़पते ही रहे इक पागल की तरह
तेरे जाने से ये दिल हो गया कितना घायल
दर्द छुपता ही नहीं, कोई घायल की तरह
तेरी आहट की तलाश में भटकता है दिल
हर निशाँ दिखता रहा फिर भी ओझल की तरह
तेरी तस्वीर को सीने से लगाए रखा
इश्क़ में जीते रहे तेरे कायल की तरह
जी आर, तेरी ग़ज़ल में वही तेरा ग़म है
दिल ने हर दर्द को लिख डाला बादल की तरह
जी आर कवियुर
22 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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