Monday, September 7, 2026

यहीं है जन्नत

यहीं है जन्नत

सुंदर स्वर्ग की वो कहानियां,
मन में नई आस जगाती हैं।
सांसों के रुकने पर मिलेंगी,
धर्म की बातें समझाती हैं।

फिर भी कोई जाना न चाहे,
धरती का यह मोह निराला।
हंसते फूलों संग जीने की,
चाहत में हर दिल मतवाला।

बांट सको जब दर्द किसी का,
मिलता सच्चा सुकून यहीं है।
ढूंढने मत जाओ अंबर में,
प्रेम बसे जहां, जन्नत वहीं है।

जी आर कवियुर 
08 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर

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