तेरी तस्वीर से दिल फिर से बेकरार हो गया
एक नज़र क्या मिली, मौसम-ए-प्यार हो गया
तेरी आँखों में जो देखा, वो ख़ुमार हो गया
मेरी तन्हाई का हर लम्हा गुलज़ार हो गया
तेरे ख़यालों ने छुआ जब से मेरे दिल को
सूना-सूना सा ये जीवन भी बहार हो गया
तेरी आहट की तमन्ना में कटी शामें मेरी
हर घड़ी अब तेरे आने का इंतज़ार हो गया
तू नहीं पास मगर साँसों में महकता है
तेरा एहसास ही जीने का करार हो गया
मेरी ख़ामोश दुआओं में तेरा नाम रहा
दर्द भी तेरी मोहब्बत में दिलदार हो गया
“जी आर” अब तो वही ख़्वाब है आँखों में बसा
तेरे मिलने का गुमाँ भी मेरा संसार हो गया
रचनाकार
जी आर कवियुर
05 09 2026
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