Friday, September 18, 2026

अपनी परछाई से आगे निकल गया

अपनी परछाई से आगे निकल गया

पीछे चलती परछाई को
उसने मुड़कर देखा नहीं,
राह कठिन थी सामने फिर भी
कदम कभी पीछे रखा नहीं।

गुज़रे हुए उन दिनों को
यादों में उसने सहेज लिया,
हार गए जिन पलों से कभी
वहीं से हौसला ले लिया।

रास्ते में बाधाएँ आईं,
फिर भी वह रुका नहीं,
अपने भीतर की रोशनी लेकर
किसी मोड़ पर झुका नहीं।

जब आखिर पीछे मुड़कर देखा,
परछाई भी पीछे रह गई,
खुद को जीत चुका था जो इंसान,
उसकी राह नई बन गई।

जी आर कवियुर 
18 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर

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