जब तुम बिना कुछ कहे आए,
दिल ने तुम्हें पहचान लिया,
एक मुस्कान की छाँव तले
एक रिश्ता चुपचाप बन गया।
बिना पूछे तुम समझ गए
आँखों की हल्की सी नमी,
बिना कहे ही थाम लिया
जब भी डगमगाई ज़िंदगी।
दूर खड़े होकर भी तुम
हमेशा पास से लगे,
खामोशियों के उन पलों में
दिल के गीत खुद ही जगे।
शब्दों के जन्म से पहले ही
प्यार हमारे बीच खिला था,
जो बात कभी कही न गई
वही रिश्ता आज भी मिला था।
जी आर कवियुर
18 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर
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