Friday, September 25, 2026

खामोशी का जवाब

खामोशी का जवाब

एक सवाल बनकर आई आहट
होंठों पर ही ठहर गई,
उत्तर खोजती निगाहें
दूर कहीं देखती रहीं।

कहने को बहुत कुछ था,
फिर भी स्वर राह में खो गया,
अर्थहीन शब्दों से कहीं अधिक
मौन सच्चा लगा।

समय कुछ उत्तर ऐसे देता है
जिन्हें पूछना नहीं पड़ता,
बंद दरवाज़ों के उस पार
रास्ते स्वयं उजागर होते हैं।

जिसे खोना समझा था कभी,
वह किसी और रूप में लौट आता है,
और जब खामोशी लंबी हुई,
उत्तर भीतर ही जन्म ले चुका था।

जी आर कवियुर 
25 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर

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