सुकूँ फिर दिल को मिला तेरे जाने के बाद,
हर एक बात में गिला तेरे जाने के बाद।
उदास शाम ने पूछा मेरा हाल-ए-दिल,
कोई जवाब न मिला तेरे जाने के बाद।
तमाम उम्र जिसे अपना समझ के चाहा,
वही तो दूर जा बसा तेरे जाने के बाद।
मन का दीप भी बुझा, रोशनी भी रूठ गई,
अँधेरा मन में पला तेरे जाने के बाद।
तेरी यादों ने मगर साथ मेरा छोड़ा नहीं,
हर एक घाव फिर खिला तेरे जाने के बाद।
न जाने कौन-सा रिश्ता था तुझसे ऐ हमदम,
कि ख़ुद से भी मैं जुदा तेरे जाने के बाद।
‘जी आर’ मन को तेरी याद से बहलाता रहा,
मगर न दर्द ये टला तेरे जाने के बाद।
रचनाकार
जी आर कवियुर
13 09 2026
(तिरुवल्ला , कवियुर)
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