लहरें स्मृतियाँ साथ लेकर आईं,
रेत के कण अनमोल पल सँजोए रहे,
सीपियों ने मौन को अपने भीतर समेट लिया,
सागर समय की रखवाली करता रहा।
साँझ ने रंग बिखेर दिए,
समीर पुराने गीत गुनगुनाती रही,
आँखें दूर क्षितिज को खोजती रहीं,
हृदय प्रेम में भीगा रहा।
समझ आया कि स्मृतियाँ पीछे नहीं रहतीं,
वे हृदय में जीवित रहती हैं,
समय आगे बढ़ता रहा,
पर प्रेम लहरों की तरह लौटता रहा।
जी आर कवियुर
14 07 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)
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