Sunday, July 12, 2026

आवश्यकता का आविष्कार

आवश्यकता का आविष्कार

ज़रूरत इंसान को सोचने पर मजबूर करती,
नई राहों की ओर आगे बढ़ाती।
जब कठिनाइयाँ जीवन को सिखाती हैं,
तभी प्रतिभाएँ दुनिया में खिल जाती हैं।

हाथों की मेहनत सपनों में बदलती,
सपने फिर उपलब्धि बन जाते।
एक मन में जलने वाला दीपक,
हज़ारों जीवन रोशन कर जाता।

स्वार्थ नहीं, जग के हित में,
वह सेवा की राह अपनाता।
समय बदल जाए चाहे कितना,
उसका कर्म इतिहास में रह जाता।

महान बनने की चाह नहीं,
अच्छे कर्म ही पहचान बनते।
मानवता को जो आगे बढ़ाएँ,
वे आविष्कार सदा अमर रहते।


जी आर कवियुर 
07 07 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)

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