Saturday, July 18, 2026

हृदय की पुकार (ग़ज़ल)

हृदय की पुकार (ग़ज़ल)
शब्द नहीं, हृदय की धड़कन लिखते हैं,
हम निडर होकर अपना जीवन लिखते हैं।

मौन स्वयं जब बोल उठे उन क्षणों में,
हम स्मृतियों का मधुर स्पंदन लिखते हैं।

दूरी चाहे जितनी हो इस संसार में,
मन से मन का अटूट बंधन लिखते हैं।

यदि यह प्रेम परम्परा के विरुद्ध विद्रोह है,
हम उसको भी अपना अर्पण लिखते हैं।

दीपक पर जलते पतंगे जैसा समर्पण,
हम इस प्रेम का पावन जीवन लिखते हैं।

'जी आर' ने सत्य सदा निर्भय होकर लिखा,
हृदय ने जो अनुभव किया, वह जीवन लिखते हैं।


जी आर कवियुर 
17 07 2026
( तिरुवल्ला, कवियुर)

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