एक भाषा ऐसी भी होती है,
जो बिना कहे सब कुछ कह जाती है।
मन के भीतर खिलते फूल-सी,
जिसे केवल संवेदनशील हृदय ही समझ पाता है।
जब क्रोध आए, मौन को अपनाओ,
ताकि शब्द किसी का दिल न दुखाएँ।
शांत क्षणों की बस एक झलक,
फिर से हृदय में उजियारा भर जाए।
निशब्द राहों पर चलते-चलते,
आशा धीरे-धीरे साथ आती है।
जैसे हर अँधेरी रात के बाद,
नई सुबह मुस्कान लेकर आती है।
मौन कभी भी कमजोरी नहीं,
यह भीतर की शक्ति का प्रमाण है।
जब प्रेम और विवेक साथ हों,
जीवन एक सुंदर यात्रा बन जाता है।
जी आर कवियुर
06 07 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)
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