Thursday, July 2, 2026

प्रकाश की खोज करता बीज

प्रकाश की खोज करता बीज

धरती की गोद में बीज सोया,
मौन ने उसकी आशा को संभाला,
वर्षा की बूंदें जीवन लेकर आईं,
सपने जड़ों की तरह फैल गए।

अंधकार में भी साहस न खोया,
नन्हा अंकुर चुपचाप ऊपर बढ़ा,
प्रभात ने अपनी किरणें फैलाईं,
प्रकाश ने मुस्कुराकर स्वागत किया।

नन्हा पौधा आकाश को निहारता रहा,
पत्ते समीर के संग झूम उठे,
फूलों ने जीवन का गीत गाना शुरू किया,
आशा एक विशाल वृक्ष बन गई।

जी आर कवियुर 
30 06 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)

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