मौन की गोद में एक राग खिला,
हृदय उसकी लय बन धड़कता रहा,
अनकही भावनाएँ स्वर बन गईं,
आत्मा चुपचाप उसे सुनती रही।
फूलों ने सुगंध से मुस्कुराहट दी,
नदियाँ निःशब्द बहती रहीं,
अनंत आकाश सुनने को ठहर गया,
प्रकृति ने एक अद्भुत रचना बुनी।
हवा भी उसे सुन न सकी,
समय भी उसे छू न सका,
प्रेम ने उस गीत को सँभाल लिया,
वह सदा हृदय में गूँजता रहा।
जी आर कवियुर
05 07 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)
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