Sunday, July 19, 2026

प्यार की बातों में ( ग़ज़ल)

प्यार की बातों में ( ग़ज़ल) 


प्यार की बातों में,  
इन्कार नहीं दिल की बातों में।

मिलने की हर इक चाहत में,  
दीवार नहीं दिल की बातों में।

उल्फ़त की महक रहती है,  
तकरार नहीं दिल की बातों में।

सच्चे दिल से जो रिश्ता हो,  
व्यापार नहीं दिल की बातों में।

आँसू भी मोती बन जाएँ,  
लाचार नहीं दिल की बातों में।

नफ़रत की कोई जगह नहीं,  
अंगार नहीं दिल की बातों में।

दुनिया चाहे कुछ भी कह दे,  
हार नहीं दिल की बातों में।

हर धड़कन तेरा नाम लिखे,  
इज़हार नहीं दिल की बातों में।

'जी. आर.' इतना ही कहना है,  
अहंकार नहीं दिल की बातों में।

जी आर कवियुर 
19 07 2026
( तिरुवल्ला, कवियुर)

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