भोर ने अपना द्वार खोल दिया,
अँधेरा धीरे-धीरे मिट गया,
किरणों ने राहों को जगा दिया,
मन ने नई यात्रा शुरू की।
समीर आशा को साथ लेकर आई,
फूल मुस्कान बनकर खिल उठे,
पक्षियों ने स्वतंत्रता का गीत गाया,
प्रकृति ने जीवन को गले लगाया।
द्वार बाहर कहीं नहीं था,
प्रकाश भीतर ही जगमगा रहा था,
जब सत्य ने हृदय को छुआ,
जीवन ने नए मार्ग खोल दिए।
जी आर कवियुर
14 07 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)
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