Saturday, July 18, 2026

अनंत का गीत

अनंत का गीत

आकाश अपनी सीमाएँ भूल गया,
हवाएँ हर दूरी को पार करती रहीं,
तारों ने अपना प्रकाश बिखेरा,
मन अनंत की खोज में चलता रहा।

सागर अपनी लहरों से गाता रहा,
पर्वत मौन में मुस्कुराता रहा,
समय अपने पल सौंपता रहा,
जीवन अपना गहरा अर्थ पाता रहा।

शाश्वत सत्य दूर नहीं था,
प्रेम हृदय में सदा खिलता रहा,
हर श्वास एक गीत बन गई,
आत्मा शाश्वत में विलीन हो गई।

जी आर कवियुर 
14 07 2026
(तिरुवल्ला,कवियुर)

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