Thursday, July 2, 2026

काँच का दिल ( ग़ज़ल)

काँच का दिल ( ग़ज़ल)

काँच का दिल था मेरा,
तोड़ दिया तूने दिल मेरा।

तेरी ख़ामोश निगाहों ने,
छोड़ दिया सूना दिल मेरा।

चाँद भी रोया मेरी रातों में,
ओढ़ लिया ग़म ने दिल मेरा।

तेरी यादों की बारिश ने,
भीग गया तन्हा दिल मेरा।

इश्क़ की राहें काँटों वाली,
चल न सका फिर दिल मेरा।

जिसको अपना रब समझा था,
तोड़ गया वो ही दिल मेरा।

अब तो अश्क़ ही साथी मेरे,
पूछ रहे हैं दिल मेरा।

'जी आर' इतना ही सीखा,
रब को सौंपा मैंने दिल मेरा।

जी आर कवियुर 
29 06 2026
(तिरुवल्ला, कवियुर)

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