हवा में बहती कहानी
हवा के कोमल पंखों पर,
एक कहानी बहती आई।
उसमें अनकहे शब्दों की,
खामोश गूंज समाई थी।
बारिश से भीगी राहों पर,
यादें ठहरकर सुनती रहीं।
पत्तों की हल्की सरसराहट में,
समय की आवाज़ गूंज उठी।
उड़ती हुई उस हवा के संग,
कहानी भी दूर निकल गई।
लेकिन उसकी खामोशी,
दिल में हमेशा ठहर गई।
जी आर कवियुर
19 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)
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