Tuesday, May 19, 2026

हवा में बहती कहानी

 हवा में बहती कहानी

हवा के कोमल पंखों पर,  
एक कहानी बहती आई।  
उसमें अनकहे शब्दों की,  
खामोश गूंज समाई थी।  

बारिश से भीगी राहों पर,  
यादें ठहरकर सुनती रहीं।  
पत्तों की हल्की सरसराहट में,  
समय की आवाज़ गूंज उठी।  

उड़ती हुई उस हवा के संग,  
कहानी भी दूर निकल गई।  
लेकिन उसकी खामोशी,  
दिल में हमेशा ठहर गई।

जी आर कवियुर 
19 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)

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