यादों की दस्तक (ग़ज़ल)
अब जब तुझे फिर याद आई है,
बचपन की वो तस्वीर मुस्कुराई है।
दिल के किसी कोने में छुपी हुई,
तेरी ही आवाज़ आज फिर सुनाई है।
सूनी पड़ी राहों पे चलते-चलते,
तेरी ही हँसी ने रौशनी दिखाई है।
ख़ामोश लम्हों की चादर ओढ़े हुए,
तेरी ही आहट दिल को छूकर आई है।
बीते हुए मौसम की ठंडी हवाओं में,
तेरी ही खुशबू फिर से समाई है।
माँ की तरह जो ममता सिखा गई थी,
उस याद ने आँखों में नमी लाई है।
आज भी आँख-मिचौली सी वो याद आई है,
दिल के आईने में तेरी सूरत उभर आई है।
वक़्त की धूल में दबे क़िस्से पुराने,
आज फिर दिल ने हर बात दोहराई है।
‘जी आर’ तेरी यादों की इस महफ़िल में,
हर शेर ने बस तेरा नाम सजाई है।
जी आर कवियुर
04 04 2026
(कवियूर, तिरुवल्ला)
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