Friday, May 15, 2026

बूंदों का नृत्य

 
बूंदों का नृत्य


जब वर्षा की बूंदें उतरीं,  
धरती पर संगीत जाग उठा।  
पत्तों की हरी छाया में,  
प्रकृति ने नृत्य शुरू किया।  

हवा के संग मुस्कुराता जल,  
टहनियों से बहता चला गया।  
छोटे जलाशयों के आईने में,  
गोल लहरें खिलती रहीं।  

भोर की कोमल रोशनी में,  
जलमोती चमकते दिखाई दिए।  
इन बूंदों के सुंदर नृत्य में,  
धरती आनंद से गाने लगी।

जी आर कवियुर 
16 05 2026
(कवियूर, तिरुवल्ला)

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