बूंदों का नृत्य
जब वर्षा की बूंदें उतरीं,
धरती पर संगीत जाग उठा।
पत्तों की हरी छाया में,
प्रकृति ने नृत्य शुरू किया।
हवा के संग मुस्कुराता जल,
टहनियों से बहता चला गया।
छोटे जलाशयों के आईने में,
गोल लहरें खिलती रहीं।
भोर की कोमल रोशनी में,
जलमोती चमकते दिखाई दिए।
इन बूंदों के सुंदर नृत्य में,
धरती आनंद से गाने लगी।
जी आर कवियुर
16 05 2026
(कवियूर, तिरुवल्ला)
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