सुख का नज़ारा” ( ग़ज़ल )
माँ की दुआओं से घर में उजियारा रहा
हर दुःख की आंधी में माँ का सहारा रहा
सूनी सी राहों में जब भी अँधेरा मिला
ममता का दीपक ही पथ का सितारा रहा
भीगे हुए नयनों में कितने सपन बसाए
अपने सभी सुख से माँ ने किनारा रहा
रोटी की खुशबू में प्रेम घुला रहता था
उसके ही हाथों में जीवन हमारा रहा
थककर जो लौटे हम दुनिया की भीड़ से
माँ का ही आँचल तब चैन का धारा रहा
बचपन की गलियों में अब भी वही स्वर है
माँ का मधुर बोल ही मन को प्यारा रहा
संसार बदलता है रिश्ते बदल जाते हैं
माँ का मगर स्नेह सदा ही हमारा रहा
‘जी आर’ के ये जीवन तो माँ की ही पूजा है
उसके चरणों में ही सुख का नज़ारा रहा
जी आर कवियुर
10 05 2026
(कवियुर ,तिरुवल्ला)

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