नन्ही चिड़िया की यात्रा
भोर की उजली किरणों संग,
नन्ही चिड़िया उड़ चली।
डालियों की संकरी राहों में,
नया आकाश खोजती रही।
हवा के कोमल पंखों पर,
वह दूरियाँ भूल गई।
नदी किनारे की खामोशी में,
अपना मधुर गीत छोड़ गई।
जब संध्या धुंधली होने लगी,
वह फिर अपने घोंसले लौटी।
इस नन्ही चिड़िया की यात्रा में,
सपनों ने अपने पंख पसारे।
जी आर कवियुर
18 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)
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