शीतल प्रकाश
चाँदनी की कोमल आभा में,
रात खामोशी से ठहर गई।
ठंडी हवा के स्पर्श तले,
पत्तियाँ धीरे से झूम उठीं।
दूर किसी सुंदर स्वप्न-सा,
प्रकाश राहों पर बिखर गया।
छुपी हुई पुरानी यादें,
मन में फिर से जाग उठीं।
भोर की ओर बढ़ते क्षणों में,
आकाश रंग बदलने लगा।
इस शीतल और कोमल प्रकाश में,
हृदय ने शांति पा ली।
जी आर कवियुर
16 05 2026
(कवियूर, तिरुवल्ला)
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