Thursday, May 21, 2026

अंधकार की परतें

अंधकार की परतें

रात की गहरी खामोशी में,  
अंधकार की परतें खुलने लगीं।  
सितारों की दूर चमक,  
राहों को हल्के से छूती रही।  

हवा की कोमल सरसराहट में,  
छिपी कहानियाँ जाग उठीं।  
परछाइयों की लंबी यात्रा में,  
यादें धीरे-धीरे चलने लगीं।  

भोर की हल्की रोशनी ने,  
अंधकार को धीरे मिटा दिया।  
जब ये परतें खुलकर बिखरीं,  
आशा ने फिर जन्म लिया।

जी आर कवियुर 
21 05 2026
(कवियूर , तिरुवल्ला)

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